सोशल मीडिया पर बेच रही घर की बनी शुगर-फ्री ड्राई फ्रूट मिठाई, हर महीने कमा रही 1 लाख रुपये
कश्मीर घाटी की 37 वर्षीय गृहिणी रिदा सज्जाद अपने होममेड शुगर-फ्री ड्राई फ्रूट मिठाई ब्रांड शिरीन-ए-यम्बरज़ल (Shireen-E-Yemberzal) के लिए लोकप्रिय हो गई हैं। वह बच्चों में स्वस्थ खाने की आदतों को भी बढ़ावा देना चाहती हैं।
रविकांत पारीक

Tuesday August 10, 2021 , 4 min Read
कश्मीर घाटी की 37 वर्षीय गृहिणी रिदा सज्जाद ने स्वस्थ खाने की आदतों को बढ़ावा देने के लिए घर का बना शुगर-फ्री ड्राई फ्रूट मिठाई का बिजनेस शुरू किया। एक उभरती हुई सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर, रिदा ने अपनी मिठाई की बिजनेस यूनिट का नाम रखा है - शिरीन-ए-यम्बरज़ल (Shireen-E-Yemberzal), जिसका अर्थ है मीठा फूल।

रिदा सज्जाद, फाउंडर, Shireen-E-Yemberzal
वह अपने कस्टमर्स के साथ अपने इंस्टाग्राम हैंडल @shireeneyemberzal पर जुड़ती हैं।
रिदा दो बेटों की मां हैं। श्रीनगर के बेमिना इलाके से आने वाली रिदा, फिलहाल नोएडा में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड कॉलेज, बेंगलुरु से फिजियोथेरेपी में BSc किया है।
रिदा को बचपन से ही खाना पकाने का शौक रहा है, और यही जुनून और विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ प्रयोग ने बिजनेस वेंचर को आगे बढ़ाया।
वह YourStory से बात करते हुए बताती हैं, “मुझे अपने परिवार के लिए अलग-अलग प्रकार के भोजन पकाने का बहुत शौक है। एक दिन, मैंने शुगर-फ्री ड्राई फ्रूट्स मिठाई में हाथ आजमाया। यह मेरे परिवार और पड़ोसियों, दोनों को बेहद पसंद आई। इसने मुझे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए घर की बनी मिठाई का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।”
अक्टूबर 2020 में, रिदा ने अपना पहला प्रोडक्ट बेचा, और तब से, पीछे मुड़कर नहीं देखा।
रिदा आगे कहती हैं: “एक कश्मीरी होने के नाते, मुझे पता है कि लोग क्या खाते हैं, बाज़ार में क्या बिक रहा है और अस्वास्थ्यकर (unhealthy) आहार के क्या परिणाम होते हैं। इसलिए मैंने लोगों को कुछ मीठा लेकिन सेहतमंद देने के बारे में सोचा। "स्वास्थ्य" को ध्यान में रखते हुए, मैंने बिना किसी कृत्रिम सामग्री (artificial ingredient) या रंग के सूखे मेवे की मिठाई बनाने का फैसला किया। मैंने अपने बच्चों को चॉकलेट, चिप्स, स्नैक्स और वेफर्स जैसे जंक फूड खाते हुए भी देखा है। हमें इसके बजाय उन्हें ड्राई फ्रूट्स और शुगर-फ्री चॉकलेट खिलानी चाहिए और उन्हें स्वस्थ खाने की आदतें सिखानी चाहिए।”
रिदा का दावा है कि वह अपनी मिठाई बनाने के लिए केवल प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करती हैं। वह कहती हैं, “मैं सूखे मेवे, विभिन्न प्रकार के बीज और मेवा, घी और केसर का उपयोग करती हूं। इनके अलावा, मैं रागी, ज्वार और बाजरा जैसे अनाज का भी उपयोग करती हूं। जब मैं शुगर-फ्री कहती हूं, तो इसका मतलब है कि प्रोडक्ट चाशनी, शहद और गुड़ से भी मुक्त हैं। मैं किसी भी प्रिजर्वेटिव, स्वाद बढ़ाने वाले या एडिटिव्स का उपयोग नहीं करती। मैं खजूर, खुबानी और अंजीर को काटकर उसका रस निकालती हूं और उन्हें सूखे मेवों की मिठाई के साथ मिलाती हूं।”
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए मिठाई

वह विभिन्न ड्राई फ्रूट डीलरों के माध्यम से अपनी सामग्री प्राप्त करती है। उन्हें अपने रिश्तेदारों के बगीचों से बादाम और अखरोट जैसे सूखे मेवे मिलते हैं।
"मैं यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुझे सबसे अच्छी गुणवत्ता मिले, मैं ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी स्वयं करती हूँ।"
उनके पति सज्जाद सुल्तान बिजनेस में उनकी मदद करते हैं। रिदा बताती हैं, "सज्जाद प्रोडक्ट्स के रजिस्ट्रेशन और क्वालिटी चेक करने में मेरी मदद करते हैं। मेरे बेटे पैक पर लेबल चिपकाते हैं, और मेरी सास सूखे मेवों को काटने के साथ चिप्स चिपकाती हैं। पैकेज्ड आइटम कूरियर कंपनियों के माध्यम से डिस्ट्रीब्यूट किए जाते हैं।"
रिदा के अस्सी प्रतिशत कस्टमर घाटी से हैं, और 20 प्रतिशत भारत के अन्य राज्यों से आते हैं।
वह कहती हैं, "मुझे बेहद अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। औसतन, मुझे प्रति दिन 7-8 ऑर्डर मिलते हैं और कभी-कभी मुझे प्रति दिन 15 ऑर्डर भी मिलते हैं। मैं अब कश्मीर में एक स्टोर खोलने की योजना बना रही हूं। बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा है, और अब तक, मैं लाभ के रूप में प्रति माह एक लाख रुपये कमा रही हूं। मुझे लगता है कि हर महिला को कुछ न कुछ करना चाहिए और घर के बने प्रोडक्ट्स से कोई बिजनेस शुरू करना चाहिए।”
सूखे मेवों की मिठाइयों के अलावा, रिदा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इम्युनिटी बार और लैक्टेशन बाइट भी बेचती है।
कोई भी मिठाई ऑर्डर कर सकता है जो प्रतिरक्षा (immunity) को बढ़ावा देती है - जिसमें एंटीऑक्सिडेंट, खनिज और प्रोटीन होते हैं।
रिदा के दिन व्यस्त हैं क्योंकि वह शादियों, सगाई और अन्य पारिवारिक कार्यों के ऑर्डर्स को पूरा करने की दिशा में काम करती है।
Edited by Ranjana Tripathi