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क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग और कैसे की जाती है, जानिए कब मानते हैं वैध, नहीं लगता जुर्माना

कहा जाता है कि इनसाइडर ट्रेडिंग गैर-कानूनी है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? अगर कोई कंपनी की किसी जानकारी के पब्लिक होने से पहले ट्रेडिंग की जाती है तो वह अवैध है, वरना उसे वैध माना जाता है.

क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग और कैसे की जाती है, जानिए कब मानते हैं वैध, नहीं लगता जुर्माना

Monday March 27, 2023 , 3 min Read

हाइलाइट्स

कहा जाता है कि इनसाइडर ट्रेडिंग गैर-कानूनी है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

अगर कोई कंपनी की किसी जानकारी के पब्लिक होने से पहले ट्रेडिंग की जाती है तो वह अवैध है, वरना उसे वैध माना जाता है.

अवैध इनसाइडर ट्रेडिंग करने पर 10 साल तक की सजा और 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

शेयर बाजार (Share Market) में अक्सर ही एक शब्द आपको सुनने को मिलता है- इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading). कई बार इनसाइडर इनफॉर्मेशन (Insider Information) भी सुनने को मिलता है. कहा जाता है कि इनसाइडर ट्रेडिंग गैर-कानूनी है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? या ऐसी भी कोई कंडीशन होती है जब इनसाइडर ट्रे़डिंग गैर-कानूनी नहीं होती है. इसे समझने के लिए आपको इससे जुड़ी कई बातों को अच्छे समझना होगा, समझ आएगा कि क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग (What is Insider Trading) और कैसे की जाती है.

पहले समझिए इनसाइडर का मतलब

किसी कंपनी में इनसाइडर उसे कहते हैं जो उस कंपनी में काम करता है या फिर उस कंपनी में शख्स के पास बड़ी हिस्सेदारी होती है. यानी सीधे-सीधे कहें तो इनसाइडर किसी भी कंपनी का अंदर का आदमी होता है. यह शख्स कंपनी का डायरेक्टर, प्रेसिडेंट या सीनियर एग्जिक्युटिव हो सकता है. कई बार इनसाइडर कंपनी का हिस्सा नहीं होता है, लेकिन फिर भी उसके पास कंपनी के अंदर की बहुत सारी अहम जानकारी होती है.

क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग?

इनसाइडर जब किसी अंदर की खबर के आधार पर ट्रेडिंग करता है तो उसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता है. इसके तहत इनसाइडर कई बार कुछ लोगों के साथ मिलकर भी ट्रेडिंग को अंजाम देता है. इनसाइडर ट्रेडिंग में अक्सर लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के शामिल कर लेते हैं और इनसाइडर ट्रेडिंग करते हैं. इससे वह अंदर की जानकारी के आधार पर कम समय में अधिक पैसा कमा लेते हैं और वो भी गारंटी के साथ.

इनसाइडर ट्रेडिंग वैध है या अवैध?

वैसे तो इनसाइडर ट्रेडिंग शब्द का इस्तेमाल हमेशा अवैध काम के संदर्भ में ही किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह वैध भी हो सकती है. अगर इनसाइडर की तरफ से कंपनी की कोई जानकारी पब्लिक में आने से पहले ही किसी शेयर की ट्रेडिंग के जरिए मुनाफा कमाया है तो यह गैर-कानूनी है. वहीं अगर इनसाइडर ने कंपनी का जानकारी पब्लिक हो जाने के बाद ट्रेडिंग की है और मुनाफा कमाया है तो यह वैध इनसाइडर ट्रेडिंग कही जाती है.

अगर कोई शख्स कंपनी के अंदर की जानकारी के दम पर उसके पब्लिक होने से पहले किसी शेयर को खरीदता या बेचता है, तो सूचना बाहर आने के बाद उसे फायदा होता है. हालांकि, इससे कई बार दूसरे निवेशकों को नुकसान भी हो जाता है. वहीं दूसरी ओर ऐसी स्थिति में एक निवेशक यानी इनसाइडर को दूसरे की तुलना में पहले पता होता है कि शेयर चढ़ेगा या गिरेगा और वह उसी हिसाब से डील करता है.

कई बार इनसाइडर इनफॉर्मेशन का इस्तेमाल कर के गलत तरीके से शेयरों की बोली लगाई जाती है. जैसे ऊंची कीमत पर बेचना या फिर बहुत कम कीमत पर खरीदना, क्योंकि कंपनी को नुकसान होने की खबर आपके पास होती है. ऐसे में अगर आपने कंपनी के शेयर शॉर्ट किए हैं तो आपको फायदा होगा, क्योंकि नुकसान की खबर बाहर आएगी तो हर कोई इसे बेच रहा होगा. इस तरह लोग नुकसान में होंगे, कंपनी की वैल्युएशन गिर रही होगी, लेकिन इनसाइडर ट्रेडिंग करने वाले को फायदा होगा.

अवैध इनसाइडर ट्रेडिंग करने पर क्या होगा?

सेबी ने अवैध इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए SEBI Regulations 2015 एक्ट बनाया है, जिसके तहत इनसाइडर ट्रेडिंग के जुड़े नियम-कायदे तय किए गए हैं. किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर तगड़े जुर्माने का प्रावधान है. साथ ही 10 साल तक की सजा भी हो सकती है. इसके तहत 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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