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डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे ‘टेक्नोलॉजी पार्क’: डॉ. जितेन्द्र सिंह

डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे ‘टेक्नोलॉजी पार्क’: डॉ. जितेन्द्र सिंह

Thursday March 13, 2025 , 3 min Read

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए "टेक्नोलॉजी पार्क" विकसित किए जा रहे हैं.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्तमान मे जारी परियोजनाओं और भविष्य की पहलों के आकलन के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि डीप-टेक स्टार्टअप्स और उद्योग-अकादमिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए चार मौजूदा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों को टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क (टीटीआरपी) में बदला जा रहा है. आईआईटी कानपुर (साइबर सुरक्षा), आईआईएससी बैंगलोर (रोबोटिक्स और स्वायत्त नेविगेशन), आईआईटी इंदौर (स्वास्थ्य सेवा) और आईएसएम धनबाद (खनन) में स्थित ये केंद्र ट्रांसलेशनल रिसर्च के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और सहायता प्रदान करेंगे.

समीक्षा बैठक में हाइड्रोजन ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों सहित उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत की प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया गया. चर्चा के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के बारे में जानकारी दी गई, जहां डीएसटी कार्यान्वयन एजेंसी बनने वाली है. डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यान्वयन में तेजी लाने और प्रभावी नीति समायोजन सुनिश्चित करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के साथ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया. केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत प्रगति की भी समीक्षा की, जहां भारत ने आईआईएससी बैंगलोर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास में चार क्वांटम प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किए हैं. ये केंद्र कंप्यूटिंग, संचार, संवेदन, मेट्रोलॉजी, सामग्री और उपकरणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि मिशन ने अब तक आठ क्वांटम स्टार्टअप का समर्थन किया है, जिनमें से दो- क्यूपीआई एआई और क्यूएनयू लैब्स- उन्नत क्वांटम कंप्यूटिंग और संचार समाधान विकसित कर रहे हैं. डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्वांटम अनुसंधान और इसके व्यावसायिक अनुप्रयोगों में तेजी लाने के लिए उद्योग सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला. इसके अलावा, बैठक में चार मौजूदा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों को प्रौद्योगिकी अनुवाद अनुसंधान पार्क (टीटीआरपी) में अपग्रेड करने पर चर्चा की गई, ताकि डीप-टेक स्टार्टअप और उद्योग-अकादमिक भागीदारी को सुविधाजनक बनाया जा सके. आईआईटी कानपुर (साइबर सुरक्षा), आईआईएससी बैंगलोर (रोबोटिक्स और स्वायत्त नेविगेशन), आईआईटी इंदौर (स्वास्थ्य सेवा) और आईएसएम धनबाद (खनन) में स्थित ये केंद्र अनुवाद संबंधी अनुसंधान के लिए बुनियादी ढांचा और सहायता प्रदान करेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर भी चर्चा की. उन्होंने अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित वैश्विक भागीदारों के साथ हाल ही में किए गए समझौतों पर भी प्रकाश डाला. अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी कि भारत वित्तीय और नीतिगत वार्ताओं के लंबित रहने तक यूरोपीय संघ के क्षितिज अनुसंधान कार्यक्रम में एक सहयोगी सदस्य के रूप में भाग लेने के लिए तैयार है.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों को आगे बढ़ाने और भारतीय वैज्ञानिकों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर सृजित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई. बैठक के समापन पर प्रमुख परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने और भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में निरंतर गति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.

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