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भारतीय वायुसेना ने गंभीर रूप से बीमार रोगियों के जीवन को बचाने के लिए विकसित किया हवाई बचाव पॉड

भारतीय वायुसेना ने गंभीर रूप से बीमार रोगियों के जीवन को बचाने के लिए विकसित किया हवाई बचाव पॉड

Sunday June 14, 2020 , 2 min Read

भारतीय वायुसेना ने महज 60 हज़ार रुपये की लागत से दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे बीमार लोगों को निकालने के लिए खास बचाव पॉड विकसित किए हैं।

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देश में कोरोनोवायरस के मामलों की संख्या में वृद्धि जारी है, इसी के साथ भारतीय वायु सेना (आईएएफ) संक्रामक रोगों के साथ गंभीर रूप से बीमार रोगियों की मदद करने के लिए एक इनोवेशन लेकर आई है। भारतीय वायुसेना ने गंभीर परिस्थितियों में व्यक्तियों को ऊंचाई वाले और दूरदराज के क्षेत्रों से निकालने के लिए एक एयरबोर्न रेस्क्यू पॉड को डिजाइन विकसित किया है।


पॉड का प्रारंभिक प्रोटोटाइप 3-बेस रिपेयर डिपो (BRD), IAF के चंडीगढ़ स्थित रखरखाव कमांड द्वारा बनाया गया था। जैसे ही COVID-19 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा एक महामारी घोषित किया गया, IAF कर्मियों ने विशेष कर कोरोना संक्रमित लोगों की सहायता के लिए एक हवाई निकासी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता को समझा।


वर्तमान में भारतीय वायुसेना सात आइसोलेशन परिवहन के लिए बने हवाई बचाव पॉड (ARPITS) को शामिल कर रही है। रक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, सिस्टम को विमानन प्रमाणित सामग्री से बने एक हल्के आइसोलेशन पॉड के रूप में विकसित किया गया है।


(चित्र: द इंडियन एक्सप्रेस)

(चित्र: द इंडियन एक्सप्रेस)




आईएएफ ने पॉड बनाने के लिए स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग किया है और उत्पाद की कुल लागत 60,000 रुपये है। 60 लाख रुपये तक के प्राइस टैग के साथ आने वाले आयातित सिस्टम की तुलना में यह अधिक उचित है।


ARPIT उच्च दक्षता पार्टिकुलेट एयर (HEPA) H-13 श्रेणी के फिल्टर का उपयोग करता है और परिवहन वेंटिलेटर का उपयोग करके आक्रामक वेंटिलेशन का सपोर्ट करता है। रोगी की दृश्यता बढ़ाने के लिए उनके पास एक पारदर्शी और लचीला कास्ट पर्सपेक्स भी है। आइसोलेशन सिस्टम में एयर एक्सचेंज, मेडिकल मॉनिटरिंग इंस्ट्रूमेंट और लाइफ सपोर्ट इंस्ट्रूमेंट्स (मल्टीपारा मॉनिटर के साथ डिफाइब्रिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, इनफ्यूजन पंप) मौजूद हैं।


सभी डिज़ाइन आवश्यकताएं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) और सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (CDC), संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित थीं।


द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इसके अतिरिक्त यह परिवहन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों, एयर क्रू और ग्राउंड क्रू को वायरस के जोखिम को रोकने के लिए लगातार नकारात्मक दबाव उत्पन्न करता है।