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डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग: MSME के लिए एक बड़ा गेमचेंजर

इनवॉइस फाइनेंसिंग छोटे व्यवसायों के लिए नकदी के प्रवाह को तेज करने और खुद को नकदी की कमी की परेशानी से मुक्त करने का एक तेज़ और लचीला समाधान है, जिससे उनके विकास को मजबूती मिलती है. डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग को अपनाने से MSME को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है.

डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग: MSME के लिए एक बड़ा गेमचेंजर

Monday June 24, 2024 , 6 min Read

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) ने सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम आकार के उद्यमों (MSME) को भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ के रूप में वर्णित किया है. ये उद्यम नौकरियां दिलाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा देते हैं, और जीडीपी ग्रोथ में योगदान देकर दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. 

आज, भारत में लगभग ~633.9 लाख MSME हैं. इसमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 324.9 लाख और शहरी भारत में 309 लाख उद्यमी हैं. देश भर में अपनी पहुंच और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, MSME को फाइनेंस तक सीमित पहुंच, नए जमाने के तकनीकी समाधानों की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और बाजार में सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग: MSME के लिए एक अभिनव समाधान

इन सभी चुनौतियों का समाधान करने वाले फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म अपने नए-नए समाधानों के साथ वास्तव में MSME के लिए एक वरदान हैं. पूंजी तक पहुंच से संबंधित बाधाओं को हल करने के लिए, वे डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस प्रदान करते हैं जो MSME को अनपेड इनवॉइस में फंसे फंड्स को जल्‍दी एवं कुशलता से अनलॉक करने की सुविधा देते हैं. इस प्रक्रिया में तत्काल नकदी के बदले में ऋणदाताओं या निवेशकों को अनपेड इनवॉइस बेचना शामिल है. इस फाइनेंसिंग पद्धति में कुछ खास तरीके शामिल हैं, जैसे इनवॉइस फैक्टरिंग, जिसमें व्यवसायी अपने इनवॉइस सीधे बेचते हैं, और इनवॉइस डिस्काउंटिंग, जिसमें वे अपने इनवॉइस के मूल्‍य के बदले उधार लेते हैं.

फिनटेक प्लेटफॉर्म्स इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लेकर आए हैं, जिससे MSME को अपने इनवॉइसेस अपलोड करने और आमतौर पर 24-48 घंटों के भीतर धन राशि प्राप्त करने की सुविधा मिलती है. पूंजी तक यह तेज पहुंच नकदी की कमी की समस्या से जूझ रहे छोटे व्यवसायों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

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डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग से छोटे व्यवसायों को क्या लाभ मिलते हैं?

MSME के लिए डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग के लाभ कई गुना हैं.

नकदी की कमी संबंधी समस्याओं का समाधान

सबसे पहले तो डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग छोटे व्यवसायों की नकदी की कमी की समस्या का समाधान करती है, क्योंकि इससे उन्हें तत्काल उन फंड्स तक पहुंच मिलती है जो आमतौर पर रिसीवेबल्‍स की समस्या में फंसे रहते हैं. यह लिक्विडिटी व्यवसायों को परिचालन व्यय को पूरा करने, विकास के अवसरों में निवेश करने और नकदी प्रवाह गैप के नुकसान से बचने की सुविधा देती है. यह प्रक्रिया छोटी-मोटी कार्यशील पूंजी खड़ी करके नकदी की कमी से संबंधित समस्याओं का समाधान करती है.

पूंजी तक आसान और सुविधाजनक पहुंच

तकनीकी प्रगति डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग को छोटे व्यवसायों के लिए सुलभ और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की पहुंच और सुविधा इस प्रक्रिया को सरल और अलग -अलग व्यवसायों की तमाम कैटेगरी के लिए सुलभ बनाती है. ये प्लेटफ़ॉर्म भारी-भरकम कागजी कार्रवाई की जरूरत को कम करते हैं और पारंपरिक फाइनेंसिंग तरीकों की तुलना में लोन की तेज़ प्रोसेसिंग करते है, जिससे जरूरतमंद को कम समय में फाइनेंसिंग की सुविधा मिल जाती है. इसके तहत MSME खुद को प्लेटफ़ॉर्म पर दर्ज करके बिना किसी कागजी कार्रवाई के सहजता से लेनदेन कर सकते हैं. 

कोलैटरल-फ्री प्रक्रिया

डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग रिसीवेबल्‍स के बेहतर मैनेजमेंट की सुविधा देकर नकदी प्रवाह में रुकावट के जोखिम को कम करती है और अधिक सटीक तरीके नकदी प्रवाह का पूर्वानुमान करके वित्तीय स्थिरता को बढ़ाती है. इसके अलावा फाइनेंसिंग की इस पद्धति में व्यवसाय की साख के आधार पर कोलैटरल (गिरवी) की जरूरत नहीं होती है. जिससे यह उन MSME के लिए बढि़या विकल्‍प है जिनके पास पारंपरिक तरीके से लोन पाने के लिए पर्याप्त परिसंपत्ति नहीं होती है. ऐसे में डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग से छोटे व्यवसायों को भुगतान में देरी के दबाव से राहत मिलती है क्योंकि फिनटेक प्लेटफॉर्म MSME के लिए बायर रिस्क को संभालते हैं, जिससे उन्हें अपने कारोबार को जारी रखने और अपने विकास और मजबूती पर फोकस करने के लिए भरपूर समय और वित्तीय सहायता मिलती है. 

लंबे समय में वृद्धि और विस्तार के लिए मार्ग प्रशस्त करना

MSME की ग्रोथ पर डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग का प्रभाव काफी व्यापक होता है. नकदी की आसान उपलब्धता इन उद्यमों को अपने कारोबार को अधिक कुशलता से मैनेज करने की सुविधा देती है, जिससे देरी या किसी तरह के व्यवधान का जोखिम कम हो जाता है. इसके अलावा, आसानी से उपलब्ध पूंजी को कारोबार की विस्तार योजनाओं में लगाया जा सकता है.

इसमें नए बाजारों में प्रवेश करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना, टीम का विस्तार करना या नई तकनीकों में निवेश करना जैसे काम शामिल हैं. धन की यह उपलब्धता न केवल तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि कारोबार के लंबे समय में विकास और विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त करता है. इसके अलावा, डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग के निरंतर इस्तेमाल के जरिए एक पॉजिटिव फाइनेंसिंग ट्रैक रिकॉर्ड बनाता है. इससे व्यवसाय की साख बढ़ सकती है, जिससे भविष्य में उसके लिए फाइनेंसिंग पाना आसान हो जाता है. विश्वसनीय भुगतान तरीकों को अपनाने से आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के बीच बने मजबूत संबंध, एक स्थिर और मजबूत कारोबारी माहौल बनाने में बड़ा योगदान करते हैं.

निष्कर्ष

भारत के आर्थिक विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, छोटे व्यवसायों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. खासकर जब कार्यशील पूंजी तक पहुंच और नकदी प्रवाह के प्रबंधन जैसे पहलुओं की बात आती है तो ये चुनौतियां और बड़ी हो जाती हैं. ये बाधाएं उनकी कारोबारी कुशलता और विकास क्षमता में बाधा डालती हैं. फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म ने डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग और डिस्काउंटिंग सॉल्यूशन प्रदान करके इस समस्या का पूर्ण समाधान पेश किया है.

इनवॉइस फाइनेंसिंग छोटे व्यवसायों के लिए नकदी के प्रवाह को तेज करने और खुद को नकदी की कमी की परेशानी से मुक्त करने का एक तेज़ और लचीला समाधान है, जिससे उनके विकास को मजबूती मिलती है. डिजिटल इनवॉइस फाइनेंसिंग को अपनाने से MSME को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है. कुल मिलाकर, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म के सपोर्ट से, छोटे व्यवसाय अपने सामने आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर सकते हैं और वृद्धि एवं प्रतिस्पर्धा के मार्ग पर चलने के लिए नए अवसरों का फायदा उठा सकते हैं.

(लेखक VoloFin के को-फाउंडर और सीईओ हैं. आलेख में व्यक्त विचार लेखका के हैं. YourStory का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है)

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Edited by रविकांत पारीक